आओ अपना घर बर्बाद करें, किसी महापुरुष को याद करें...

देश की बड़ी-बड़ी समस्याओं को दरकिनार करते हुए, आज लगभग सभी पार्टियां मूर्ति निर्माण और स्मारक बनाने में लगी हुई हैं। इस पर रवीश कुमार का यह वीडियो और उनकी बातें देखने और सुनने लायक हैं...

आओ अपना घर बर्बाद करें, किसी महापुरुष को याद करें

जिस तरह से मूर्तियों और स्मारकों की स्थापनाओं को लेकर भगदड़ मची है, लगता नहीं कि इनका वास्ता किसी को याद करने से है। सरकार के ख़ज़ाने से ऊँची ऊँची मूर्तियाँ बन जाती हैं। जनता के पास इलाज के पैसे नहीं है लेकिन कई सौ करोड़ की मूर्तियाँ बन जाती हैं। करोड़ों रुपये लगाकर याद करने का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं लेता है।

मेरी सरकार से गुज़ारिश है कि वह युवाओं को नौकरी न दे। उनकी जाति के दो, धर्म के चार और राष्ट्र के छह महापुरुषों की लघु मूर्तियों से भरा एक थैला दे दें ताकि वह गर्व के भाव से भरा रहे। आए दिन किसी न किसी मूर्ति की आधारशिला रखी जा रही है और अनावरण किया जा रहा है। राजनीति कितना आसान हो गई है। दो मूर्ति लगाकर नेता सीना चौड़ा कर लेता है कि वह समाज और धर्म के लिए काम कर रहा है। हिन्दी प्रदेशों की आय न्यूनतम स्तर पर है। स्मारकों का निर्माण और उसकी राजनीति अधिकतम स्तर पर है।